Posts

Showing posts with the label शब्द

अनकहे मौन

अनकहे मौन सुनता यहाँ कौन, शब्दों की लय कहता नहीं मौन। मौन सृष्टि का परिचायक, मौन वाणी वसुधा की, मौन कंठ वेदना के, मौन स्वर साधक के, अनकहे मौन सुनता यहाँ कौन, शब्दों की लय कहता नहीं मौन। अनसुने स्वर मौन की, घुट रहे अब अंदर ही अंदर, बिखर गए स्वर लहरी ये, सृष्टि की मन के अंदर। अनकहे मौन सुनता यहाँ कौन, शब्दों की लय कहता नहीं मौन। नैन मौन बहते आँसू बन, हृदय पीड़ सहता मौन बन, मौन खड़ी पर्वत पीड़ बन, मौन रमता बालक के मन। अनकहे मौन सुनता यहाँ कौन, शब्दों की लय कहता नहीं मौन। ग्यान साधक के अन्दर मौन, अग्यानी दूर सोचता मौन, उत्कंठा, जिग्यासा मौन, घट घट में व्याप्त मौन, अनकहे मौन सुनता यहाँ कौन, शब्दों की लय कहता नहीं मौन। मौन ईश्वर के स्वर, मौन प्राणों के प्रस्वर, मौन मृत्यु के आस्वर, मौन दृष्टि उस महाकाल की। अनकहे मौन सुनता यहाँ कौन, शब्दों की लय कहता नहीं मौन।

अनछुआ शब्द

मैं अनछुआ शब्द हूँ एक! किताबों में बन्द पड़ा सदियों से, पलटे नही गए हैं पन्ने जिस किताब के, कितने ही बातें अंकुरित इस एक शब्द में, एहसास पढ़े नही गए अब तक शब्द के मेरे। एक शब्द की विशात ही क्या? कुचल दी गई इसे तहों मे किताबों की, शायद मर्म छुपी इसमे या दर्द की कहानी, शून्य की ओर तकता कहता नही कुछ जुबानी, भीड़ में दुनियाँ की शब्दों के खोया राह अन्जानी। एक शब्द ही तो हूँ मैं! पड़ा रहने दो किताबों में युँ ही, कमी कहाँ  इस दुनियाँ में  शब्दों की, कौन पूछता है बंद पड़े उन शब्दों को? कोलाहल जग की क्या कम है सुनने को? अनछुआ शब्द हूँ रहूँगा अनछुआ! इस दुनियाँ की कोलाहल दे दूर अनछुआ, अतृप्त अनुभूतियों की अनुराग से अनछुआ, व्यक्त रहेगी अस्तित्व मेरी "कविता काव्य" में अनछुआ, अपनी भावनाओं को खुद मे समेट खो जाऊँगा अनछुआ।