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अक्सर

अक्सर अन्त:मानस मे एकाकीपन की कसक सी, अंतहीन अन्तर्द्वन्द अक्सर अन्तरआत्मा में पलती, मानस पटल पर अक्सर एक एहसास दम तोड़ती| अक्सर वो एकाकीपन बादल सा घिर आता मन में, दर्द का अंतहीन एहसास अकसर तब होता मन मैं, तप, साधना, योग धरी की धरी रह जाती जीवन में| अक्सर रह जाते ये एहसास अनुत्तरित अनछुए से, अंतहीन अनुभूति लहर बन उठती अक्सर मन से, तब मेरा एकाकीपन अधीर हो कुछ कहता मुझसे|